Do Main

दो मैं

मुझमे दो मैं बसते हैं |

एक मैं मस्त, बेबाक, ज़िन्दगी को एक मेले की तरह मिलता हूँ,

एक मैं संकोची, चुपचाप हर हार-नकार से डरता हूँ ||

एक मैं मुस्कुराता, खिलखिलाता, सबको गले लगता हूँ,

एक मैं अपने मन के अंधेरो में अनकही बातें दोहराता हूँ||

एक मैं मिलनसार, हर बात को किस्से-कहानियों में सुनाता हूँ,

एक मैं अपने अकेलेपन में ही खुदको सुरक्षित पाता हूँ||

एक मैं दोस्त जो बिना मांगे ही अपनी राय दिए जाता हूँ,

एक मैं स्वार्थी, अभिमानी जो अपने सिवा कुछ और न सोच पाता हूँ||

एक मैं आत्मविश्वासी-दृद्निश्चयी, सबसे अपनी बात मनवाता हूँ,

एक मैं अनिश्चित-अपरिचित सा अपने फैसलों से कतराता हूँ||

एक मैं ज्ञान-गुरु, सबको नित-नए पाठ पढाता हूँ,

एक मैं अंजान, अपने अंतरद्वंद से स्वयं ही घबराता हूँ||

एक मैं दिलवाला, जो सबसे दिल लगता हूँ,

एक मैं निर्मोही, जो अपनों से ही दुत्कार खाता हूँ||

एक मैं दबंग, जोशीला, हर काम में आगे आता हूँ,

एक मैं आलसी, निठल्ला, सुस्तराम कहलाता हूँ||

कही न कहीं, किसी न किसी अंष में मुझमें ये सब रहते हैं,

हर दिन मुझसे बेहतर इंसान बनने को कहते हैं,

ख्वाहिश है क़ि जल्द ही वो दिन आ जाये, जब दोनों मैं मुझमें एक हो जायें|

तब तक मैं इन दोनों मैं की गुत्थियाँ सुलाझाऊंगा,

और मुझमें दो मैं रहते हैं, यही कहता जाऊंगा||

2 thoughts on “Do Main

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