Gudiya Bitiya…My first attempt to write a hindi kavita…

गुडियाबिटिया

नटखट अंखियो की कनखियों से मुस्कुराती वो,

यहाँ से वहा भागती खिलखिलाती वो,

अपनी नन्ही उंगलियों से मेरा हाथ थामे ‘मम्मा इद्हड़ आ’ कहके मुझे बुलाती वो,

कभी छुपती-छुपाती कभी बाहें बढाकर, मुझे गले लगती वो,

अपनी मीठी सी तोतली ज़बान में बोलकर, मेरा दिल पिघलाती वो,

जो पूछो की कौन हो तुम, तो खुदको मम्मा की गुडिया बिटिया बतलाती वो,

डांट फटकार लगाने से एक पल रूठकर, अगले ही पल सब भूल जाती वो,

न रुकती, न थकती , सारे घर को सर पर उठा, इठलाकर थोडा इतराकर चलती जाती वो,

चोट अगर खा ले कभी तो, गिरकर संभलके लहराते हुए, खुद ही झट खड़ी हो जाती वो,

य़ू तो माँ अपने बच्चे की पहली गुरु कहलाती है, मेरी बिटिया तो मुझे हर दिन एक नयी सीख दे जाती है|

न झूठ न फरेब, न बुराई न द्वेष, न बनावट न कलेश|

कोई मुझे मेरा बचपन लौटा दे, मुझे मेरी बिटिया सा बना दे|

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